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Speaker Statement -

स्वर्णिम भारत के निर्माता, महान चक्रवर्ती सम्राट अशोक की 2329वीं जयंती

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स्वर्णिम भारत के निर्माता, महान चक्रवर्ती सम्राट अशोक की 2329वीं जयंती चैत्र शुक्ल अष्टमी अर्थात अशोका अष्टमी,  05 अप्रैल 2025 (शनिवार)  ✅ सम्राट अशोक की जयंती क्यों?      भारत में जन्मदिन मनाने की परंपरा प्राचीन है। प्राचीन काल से ही समाज जन्मदिन व्यक्तिगत और सार्वजनिक स्तर पर मानता रहा है। बहुजन समाज अपने महामानवों का, जिनके कार्यों से समग्र समाज में परिवर्तन आया, जिनके जीवन से मान-सम्मान, प्रतिष्ठा, गौरव और गरिमा प्राप्त हुई, उन सभी महामानवों के प्रति अपनी कृतज्ञता, आदर, सम्मान व्यक्त करके उनके विचार एवं संघर्ष की विरासत को जारी रखने की प्रेरणा लेते हुए उनका जन्मदिन लोकोत्सव के रूप में (जयंती के रूप में) समाज मनाता रहा है।  प्रसिद्ध इतिहासकार स्टेबो कहते हैं, "भारत में जन्मदिन मनाने की परंपरा मौर्य शासकों ने शुरू की थी।" भारत में अपना जन्मदिन मनाने की परंपरा सम्राट अशोक के द्वारा शुरू कर दी गई थी। कलिंग युद्ध के बाद अपनी प्रजा को खुशहाल रखने हेतु सम्राट अशोक ने अपना जन्मदिन मनाना शुरू किया था, जो आज भी जारी है और न केवल कलिंग उड़ीसा में बल्कि पूरे भारतवर...

75 GLORIOUS YEARS of Indian Constitution ! ACHIEVEMENTS & FUTURE PLANS? -Kamlakant Kale

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भारतीय संविधान के 75 वर्षों में इसकी उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की गई है। संविधान ने सामाजिक समानता, न्याय और बंधुत्व की नींव रखी है। कार्यक्रम का उद्देश्य संविधान की महानता को समझाना और समाज में जागरूकता फैलाना है, ताकि सभी नागरिकों को उनके अधिकारों का ज्ञान हो सके। भारतीय संविधान ने देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह संविधान ही है जो नागरिकों को गरिमा और समानता का अधिकार देता है। संविधान के 75 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। यह केवल एक दिन की चर्चा नहीं , बल्कि एक दीर्घकालिक योजना है। स्वर्णम भारत का पुनर्निर्माण और मूल निवासियों की गौरवमयी विरासत को पुनर्स्थापित करने का लक्ष्य संविधान के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है। भारतीय संविधान ने राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह समाज में समानता और एकता को बढ़ावा देने का माध्यम है , जो सभी नागरिकों के लिए है। संविधान के संदर्भ में बाबा आंबेडकर के विचारों को समझना आवश्यक है। उन्होंने सभी भारतीयों के लिए समानता की आवश्यकता पर जोर दिया था। भार...

कॉलेजियम व्यवस्था भारतीय न्यायपालिका के लिए खतरा है ? -Kamlakant Kale

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कॉलेजियम सिस्टम भारतीय न्यायपालिका के लिए खतरा बन चुका है। न्यायपालिका ने किसानों और मजदूरों के अधिकारों की अनदेखी की है। ईवीएम में गड़बड़ियों पर सुप्रीम कोर्ट ने पर्दा डालने का काम किया है। न्यायपालिका का चरित्र सामाजिक होना चाहिए, अन्यथा यह लोकतंत्र के लिए संकट पैदा करेगा। ✅ जजों की नियुक्तियों में विविधता की कमी से न्यायपालिका का जातीय चरित्र बिगड़ रहा है। इससे न्यायिक निर्णयों में पक्षपाती रवैया देखने को मिल रहा है। ✅ सुप्रीम कोर्ट के फैसले, जैसे राम मंदिर विवाद, पर न्यायपालिका की निष्पक्षता पर सवाल उठे हैं। और यह स्पष्ट होता है कि आस्था के आधार पर निर्णय किए जा रहे हैं। ✅ इलेक्टोरल बंड का मामला चुनावी भ्रष्टाचार का एक बड़ा उदाहरण है। सुप्रीम कोर्ट ने इसे असंवैधानिक माना, लेकिन राजनीतिक पार्टियों के पास ही पैसा रहने दिया। ✅ ईवीएम के मुद्दे पर कई चुनावों में गड़बड़ियों के आरोप लगे हैं। लेकिन सुप्रीम कोर्ट की तरफ से इन मामलों की सुनवाई में पारदर्शिता नहीं दिखाई गई। ✅ सरकार ने लेबर लॉ में बदलाव किये, इस पर भी सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के हित में निर्णय किए गए हैं, जिससे मजदूरों के संवैधा...

अति पिछड़ी एवं घुमंतू जनजातियों की दशा और उनकी दिशा -Kamlakant Kale |

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अति पिछड़ी और घुमंतू जनजातियों की वर्तमान स्थिति और विकास की दिशा का विश्लेषण महत्वपूर्ण है। इसके लिए उनकी सांस्कृतिक, आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों को गहराई से समझना आवश्यक है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि भारत में उन्हें किस प्रकार का अन्याय और अत्याचार झेलना पड़ रहा है। आजादी के बाद भी इनकी आर्थिक और सामाजिक स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है, जो एक गंभीर विषय है।  यह घुमंतु जातियों की सबसे बड़ी बात क्या है इन्हे चाहे उनको कितना भी प्रताड़ित किया गया हो। मगर 2000 साल से ज्यादा समय हो गया उन्होंने अपना कल्चर नहीं छोड़ा। आज हर घुमंतु जाति के पास अपनी बोली भाषा है, उनका लोक संगीत है,  उनका लोक नृत्य है, उनका अपना झंडा है, हर चीज उनकी ब्राह्मणों से स्वतंत्र है।इसलिए कोई भी अनपढ या कम पढ़ा लिखा जो घुमंतु जाति का व्यक्ति है अपने किसी कार्यक्रम के लिए ब्राह्मण को नहीं बुलाएगा। हा पर पढ़ा लिखा जरूर बुलाएगा और पहले नंबर पर बुलाएगा। आरक्षण नीति को बनाते समय एक भूमिका यह थी कि इससे जो सामाजिक ध्रुवीकरण होगा, सोशल पोलराइजेशन होगा, समान हितों पर, एक कॉमन इंटरेस्ट पर, कॉमन ऑब्जेक्ट पर यह जाति...

आजादी के बाद भी घुमंतू जनजातियाँ जाति व्यवस्था की शिकार बनी हुई हैं -Mr. Govind Sonnar

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   आजादी के बाद भी घुमंतू जनजातियाँ जाति व्यवस्था की शिकार बनी हुई हैं। इन जनजातियों के खिलाफ आज भी जातिगत भेदभाव जारी है, जो कि उनकी Dignified जीवन शैली के लिए एक बड़ी चुनौती है। ग्रामीण क्षेत्रों में इन लोगों के साथ अन्याय एवं अत्याचार आज भी जारी हैं, जिससे उनके जीवन में निरंतर कठिनाइयाँ बनी हुई हैं। ऐसे कई उदाहरण हैं जहाँ इन समुदायों को सामाजिक और आर्थिक रूप से हाशिए पर धकेल दिया गया है, और यह स्थिति समय के साथ और भी गंभीर होती जा रही है।  ✅ यह घुमंतु जनजातिया और एमबीसी कौन है? हम सभी लोगों को ओबीसी तो मालूम है। क्योंकि ओबीसी का जिक्र हमेशा आता है मगर ये जो एमबीसी है Most Backward Class यह जो पिछड़ी जातियां है ये उनमें से भी पिछड़े हैं यानिकि पिछड़े में भी पिछड़े इससे आप अंदाजा लगा सकते हो की ये कितनी पिछड़ी है ✅आजादी के 70-75 साल बाद भी अगर Most Backward Class है तो आप इससे अंदाजा लगा सकते हो की ये कितनी पिछड़ है। अगर इनको देखा जाए तो यह ज्यादा से ज्यादा गांव में सेवा देने वाली जातियां है जैसे कि इसको हिंदी में तो क्या कहते हैं मुझे मालूम नहीं मगर महाराष्ट्र के मराठी...

भारत के 90 प्रतिशत साधन-संसाधनों पर सवर्णों का कब्जा कैसे है? -Mr. Manas Jena

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  आज भी बहुजन समाज (मूलनिवासी समाज) यह सवर्णों द्वारा संचालित साधन-संसाधनों पर निर्भर है, और यह स्थिति कई दशकों से चलती आ रही है। कि भारत के 90 प्रतिशत साधन-संसाधनों पर सवर्णों का इतना प्रभावशाली कब्जा है? इन सवालों के उत्तर ढूंढना जरूरी है ताकि हम अपने समाज में हो रहे असमानताओं को समझ सकते  है और उनके समाधान के लिए ठोस कदम उठा सकते है। इसलिए, इस मुद्दे पर व्यापक विचार-विमर्श करना और समझना अत्यंत आवश्यक है।  ✅थमास पिकेटी (Thomas Piketty) एक अर्थशास्त्री हैं, जिन्होंने भारत के बारे में एक रिपोर्ट प्रस्तुत की है। प्रधानमंत्री की सलाहकार समिति द्वारा भी रिपोर्ट प्रस्तुत की गया था। ✅इसके अतिरिक्त, हमारे राज्य मंत्री की राष्ट्रीय सांख्यिकी राष्ट्रीय संस्थान (एनएसएस) के अधीन एक सर्वेक्षण भी हुआ है, जिसका नाम "ऑल इंडिया डेप्ट एंड इन्वेस्टमेंट सर्वे" है। इसके साथ ही, वर्ल्ड हंगर इंडेक्स और वर्ल्ड इनक्वालिटी रिपोर्ट जैसे अन्य रिपोर्ट्स भी मौजूद हैं। ✅इन सभी रिपोर्ट्स का एक संक्षिप्त आधार यह है कि, फोर्ब्स पत्रिका (Forbes Magazine) जैसे स्रोतों ने बताया है कि भारत में आय और संपत्ति...

क्या घुमन्तु जनजातियों की अलग सूची बनानी चाहिए -Manohar Kokare

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क्या घुमन्तु जनजातियों की अलग सूची बनानी चाहिए, ताकि उनकी सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक स्थिति को बेहतर समझा जा सके? इससे उनकी चुनौतियों और आवश्यकताओं की पहचान करना आसान होगा, जिससे उनकी पहचान को मान्यता मिलेगी और विकास के लिए उपयुक्त नीतियों का निर्माण संभव हो सकेगा. ✅ मैं एक घुमंतु जातु से जाति से आता हूं. जिसे महाराष्ट्र में धनगर नाम से जाना जाता है धनगर जो थे यह पुराने जमाने में शुपालक नाम से संबोधित किया जाता था बोला जाता था पशुपालक जो थे वह चंद्रगुप्त मौर्या के काल से राजा थे सम्राट अशोक चंद्र गुप्त मौर्या से लेकर आज तक हमने एक सब भारतवर्ष के ऊपर राज किया था लेकिन आज हमारी जो स्थिति है वह इस गांव से दूसरे गांव सरे गांव से तीसरे गांव भटकने पर मजबूर है क्योंकि हमारे समाज में कोई लीडरशिप डेवलप नहीं हो रही और जो लीडरशिप तो डेवलप हो रही है लेकिन उनमें सामाजिक ईमानदारी का अभाव है जब भी कोई लीडरशिप डेवलप होती है उसको खत्म करने का यह वस्था पूरी तैयारी करे हुए हैं। ✅आज भी महाराष्ट्र के अंदर या कहीं पर भी घुमंतु जाति में घुमंतु जाति जो है वह एससी में है कहीं एसटी में है महाराष्ट्र में ओबीस...