आजादी के बाद भी घुमंतू जनजातियाँ जाति व्यवस्था की शिकार बनी हुई हैं -Mr. Govind Sonnar

  

आजादी के बाद भी घुमंतू जनजातियाँ जाति व्यवस्था की शिकार बनी हुई हैं। इन जनजातियों के खिलाफ आज भी जातिगत भेदभाव जारी है, जो कि उनकी Dignified जीवन शैली के लिए एक बड़ी चुनौती है। ग्रामीण क्षेत्रों में इन लोगों के साथ अन्याय एवं अत्याचार आज भी जारी हैं, जिससे उनके जीवन में निरंतर कठिनाइयाँ बनी हुई हैं। ऐसे कई उदाहरण हैं जहाँ इन समुदायों को सामाजिक और आर्थिक रूप से हाशिए पर धकेल दिया गया है, और यह स्थिति समय के साथ और भी गंभीर होती जा रही है। 


यह घुमंतु जनजातिया और एमबीसी कौन है? हम सभी लोगों को ओबीसी तो मालूम है। क्योंकि ओबीसी का जिक्र हमेशा आता है मगर ये जो एमबीसी है Most Backward Class यह जो पिछड़ी जातियां है ये उनमें से भी पिछड़े हैं यानिकि पिछड़े में भी पिछड़े इससे आप अंदाजा लगा सकते हो की ये कितनी पिछड़ी है


✅आजादी के 70-75 साल बाद भी अगर Most Backward Class है तो आप इससे अंदाजा लगा सकते हो की ये कितनी पिछड़ है। अगर इनको देखा जाए तो यह ज्यादा से ज्यादा गांव में सेवा देने वाली जातियां है जैसे कि इसको हिंदी में तो क्या कहते हैं मुझे मालूम नहीं मगर महाराष्ट्र के मराठी में इसको 12 बलुतेदार कहते हैं जो कि सेवा देने वाले हैं, कुमार मटके बना कर देता है, लोहार लोहे के अवजार बनाकर देता है, नाई बाल काटता है, गडरिया है, ऐसे अनेक जो लोग हैं ये सेवा देने के काम करते हैं


✅इनको महाराष्ट्र में 12 बलुतेदार कहते हैं यानीकि कितनी एमबीसी की जातियां महाराष्ट्र में है? 12 बलुतेदार जो है उसमें में भी एक दूसरे है 18 अलुतेदार तो साथियों इनकी जो विशेषता है यह गांव के पॉपुलेशन में बहुत अल्पसंख्याक है। जो एमबीसी गांव में रहता है इनके ज्यादा से ज्यादा पांच-दस ही घर होते हैं ज्यादा हो गये तो 15 होते हैं यानीकि गांव की जो भी मान लो हजार-हजार के हजार-हजार के पापुलेशन है। उन लोगो की संख्या जो होगी एमबीसी की ज्यादा से ज्यादा 100 या 50 इतनी होगी।


✅तो इसमें क्या होता है जिस तरह से अनुसूचित जाति के लोग जातीय अत्याचार के शिकार होते हैं उसी तरह से एमबीसी के लोग भी जातीय अत्याचार के शिकार होते हैं मगर गांव में जो रिवाज होते हैं उसकी वजह से उनके ऊपर जो अन्याय होता है वह गांव के बाहर भी नहीं आता। अनुसूचित जाति को कानूनी प्रावधान होने की वजह से वे पुलिस स्टेशन में जाते हैं एट्रोसिटी एक्ट के अंतर्गत जो अन्याय करने वाला है उन पर कानून कार्यवाही भी होती है मगर जो एमबीसी के लोग हैं उनके ऊपर होने वाले अन्याय-अत्याचार के खिलाफ कोई कानूनी कार्यवाही भी नहीं होती है। गांव का मामला गांव के अंदर ही सिमट जाते हैं और यह अन्याय सहन करते हैं।


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