कॉलेजियम व्यवस्था भारतीय न्यायपालिका के लिए खतरा है ? -Kamlakant Kale
कॉलेजियम सिस्टम भारतीय न्यायपालिका के लिए खतरा बन चुका है। न्यायपालिका ने किसानों और मजदूरों के अधिकारों की अनदेखी की है। ईवीएम में गड़बड़ियों पर सुप्रीम कोर्ट ने पर्दा डालने का काम किया है। न्यायपालिका का चरित्र सामाजिक होना चाहिए, अन्यथा यह लोकतंत्र के लिए संकट पैदा करेगा। ✅ जजों की नियुक्तियों में विविधता की कमी से न्यायपालिका का जातीय चरित्र बिगड़ रहा है। इससे न्यायिक निर्णयों में पक्षपाती रवैया देखने को मिल रहा है। ✅ सुप्रीम कोर्ट के फैसले, जैसे राम मंदिर विवाद, पर न्यायपालिका की निष्पक्षता पर सवाल उठे हैं। और यह स्पष्ट होता है कि आस्था के आधार पर निर्णय किए जा रहे हैं। ✅ इलेक्टोरल बंड का मामला चुनावी भ्रष्टाचार का एक बड़ा उदाहरण है। सुप्रीम कोर्ट ने इसे असंवैधानिक माना, लेकिन राजनीतिक पार्टियों के पास ही पैसा रहने दिया। ✅ ईवीएम के मुद्दे पर कई चुनावों में गड़बड़ियों के आरोप लगे हैं। लेकिन सुप्रीम कोर्ट की तरफ से इन मामलों की सुनवाई में पारदर्शिता नहीं दिखाई गई। ✅ सरकार ने लेबर लॉ में बदलाव किये, इस पर भी सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के हित में निर्णय किए गए हैं, जिससे मजदूरों के संवैधा...